Ocean bottom relief in hindi/mahasagariya nital kya hai?

Ocean bottom relief in hindi, mahasagariya nital kya hai?, महासागरीय नितल के उच्चावच, महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल क्या है?, महासागरीय मैदान क्या होते हैं?
Ocean bottom relief in hindi, mahasagariya nital kya hai?, महासागरीय नितल के उच्चावच

हिन्दी ऑनलाइन जानकारी के मंच पर भूगोल विषय के अन्तर्गत आज हम जानेंगे Ocean bottom relief in hindi/mahasagariya nital kya hai?, महासागरीय नितल के उच्चावच के बारे में, तथा इससे जुड़े हुए प्रमुख तथ्यों के बारे में जैसे कि – महाद्वीपीय मग्नतट क्या होता है?, महाद्वीपीय ढाल क्या है ?, महासागरीय मैदान क्या होते हैं ?, गर्त क्या हैं ?, द्वीप क्या हैं?

Ocean bottom relief in hindi/mahasagariya nital kya hai?, महासागरीय नितल के उच्चावच के बारे में -:

(Ocean bottom relief in hindi/mahasagariya nital) महासागरीय नितल का उच्चावच अत्यधिक विविधता लिए हुए है। इसके अन्तर्गत विस्तृत मैदान, गहरी घाटियां, ऊंचे पर्वत, पहाड़ियां, पठार आदि पाए जाते हैं। अर्थात् सागर नितल का उच्चावच पृथ्वी के स्थल मंडल जैसी ही विशेषताएं लिए हुए है। महासागरीय नितल के उच्चावच को हिस्पोग्राफिक वक्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसके आधार पर सागर नितल में निम्नलिखित प्रकार की स्थल आकृतियां या उच्चावच पाए जाते हैं।

महाद्वीपीय मग्नतट -:

यह महासागर का महाद्वीप से लगा हुआ भाग होता है। अर्थात् यह महाद्वीप का वह भाग होता है। जो सागरीय जल से घिरा रहता है। इसकी सामान्य रूप से गहराई 100 फेदम ( 1 फेदम – 6 फीट ) होती है। इसमें ढाल प्रवणता 1-3° के बीच पाई जाती है। अर्थात् इसमें गहराई धीरे धीरे बढ़ती है। महासागरीय मग्नतट महासागरों के कुल क्षेत्रफल के लगभग 7.5% भाग पर फैले हुए हैं। परंतु अलग – अलग महासागरों में एवं एक ही महासागर के अलग अलग भागों में मग्नतटों का विस्तार अलग अलग पाया जाता है।

प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग में या विशेष रूप से दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तटों पर सर्वाधिक कम चौड़े मग्नतट पाए जाते हैं। इसके विपरित साइबेरिया के आर्कटिक तट पर सर्वाधिक चौड़े मग्नतट पाए जाते हैं। महाद्वीपीय मग्नतटों का सागरीय जीव जंतुओं की दृष्टि से एवं प्राकृतिक संसाधन की दृष्टि से अत्यधिक महत्व होता है।

महाद्वीपीय मग्नतट तुलनात्मक रूप से कम गहरे होने के कारण इसमें आसानी से सूर्य की किरणें प्रवेश कर जाती हैं। जिससे इसके निचले भाग में अत्यंत सूक्ष्म जीवों अर्थात् planktons की उत्पत्ति होती है। यह सूक्ष्म जीव अत्यंत छोटी मछलियों के खाद्य पदार्थ होते हैं। महाद्वीपीय मग्नतट में ही सागर के कुल जैव भाग का लगभग 80% भाग पाया जाता है। अर्थात् सागर के अंदर खाद्य श्रंखला का यह मुख्य आधार है। मानव के लिए महाद्वीपीय मग्नतट इसलिए महत्त्वपूर्ण होता है क्यूंकि खाद्य योग्य सर्वाधिक मछलियां इसी भाग में मिलती हैं। जैसे -: उत्तरी सागर का डॉगर बैंक, कनाडा के पूर्वी भाग में स्थित ग्रांड बैंक विश्व के प्रसिद्ध मतस्ययन क्षेत्र हैं।

महाद्वीपीय मग्नतटीय भागों में महाद्वीपों से आने वाली नदियां अपने अवसादों को जमा करती हैं। जिससे विशिष्ट किस्म की अवसादी चट्टानें बनती हैं। और यही चट्टानें खनिज तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार होती हैं। विश्व में पाए जाने वाले कुल पेट्रोलियम का लगभग 25% भाग महाद्वीपीय मग्नतटों से प्राप्त किया जाता है। जैसे -: उत्तरी सागर, फारस की खाड़ी, मैक्सिको की खाड़ी, बॉम्बे हाई, कृष्णा गोदावरी बेसिन।

भारत के पूर्वी तट पर महाद्वीपीय मग्नतट की चौड़ी पट्टी है। इसकी औसत चौड़ाई 70 किलो मीटर है।

सागर के जिन तटीय भागों में महाद्वीपीय मग्नतट अधिक विकसित होते हैं। ऐसे क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। विश्व के अनेक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल चौड़े महाद्वीपीय मग्नतटों पर ही पाए जाते हैं। जैसे -: भारत में गोवा और केरल के तट।

महाद्वीपीय ढाल -:

महाद्वीपीय ढाल महाद्वीपीय मग्नतट के बाद विकसित सागर का एक ऐसा भाग होता है। जहां गहराई तेज़ी से बदलती है। इसकी गहराई 3000 मीटर तक पाई जाती है। इसकी ढाल प्रवणता 3-45° तक पाई जाती है। इस भाग में गहराई अधिक होने के कारण सूर्य की किरणें आसानी से नीचे नहीं पहुंच पाती हैं। जिन तटों के साथ महाद्वीपीय ढाल विशेष रूप से पाए जाते हैं। वहां उत्तम किस्म के बंदरगाह विकसित करने में आसानी होती है।

महासागरीय मैदान -:

महासागरीय मैदान महासागर का सर्वाधिक विस्तृत भाग है। यह महासागर के कुल क्षेत्रफल के लगभग 75% भू – भाग पर फैला हुआ है। महासागरीय मैदानों का भी विस्तार अलग अलग महासागरों में अलग अलग पाया जाता है। जैसे -: प्रशांत महासागर में महासागरीय मैदानों का विस्तार लगभग 80% तक है। तो वहीं अटलांटिक महासागर में लगभग 53% तक है। इसकी औसत गहराई 6000 मीटर तक पाई जाती है। इन पर पाए जाने वाले अवसाद स्थलजनित अवसाद तथा समुद्री जीवों के अस्थि पंजर होते हैं। सामान्यतः महासागरीय मैदान उन क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। जहां स्थलजनित अवसादों की आपूर्ति अधिक होती है। विषम आकृतियां अधिक अवसाद आपूर्ति से दफन होकर समतल क्षेत्र में विकसित हो जाती हैं।

महासागरीय मैदानों में यहां वहां बिखरी हुई कुछ छोटी छोटी एवं कम ऊंची पहाड़ियां भी मिलती हैं। जो सी – माउंट, गुयोट या गाईऑट, कटक नामों से जानी जाती हैं।

सी – माउंट -:

ज्वालामुखी की क्रिया से बनी हुई लगभग 1000 मीटर ऊंची पहाड़ियां, जो महासागरीय मैदानी भागों में यहां वहां पाई जाती हैं। सी – माउंट कहलाती हैं। प्रशांत महासागर में इनकी संख्या सर्वाधिक पाई जाती है।

गुयोट या गाईऑट -:

लगभग 1000 मीटर ऊंची एवं ज्वालामुखी की क्रिया से बनी हुई ऐसी पहाड़ियां, जो शिखर पर समतल होती हैं। गुयोट या गाईऑट कहलाती हैं।

कटक -:

महासागरीय मैदानों में फैली हुई अत्यधिक लंबी – लंबी एवं ऊंची पहाड़ियों को कटक कहते हैं। विश्व का सर्वाधिक लंबा कटक मध्य महासागरीय कटक है। जो अटलांटिक महासागर में फैला हुआ है। ये महासागरीय कटक पृथ्वी पर विवर्तनिक संचरणों के साक्षी हैं। यह भाग अत्यधिक गहरा होने के कारण इसके नितल पर सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं। जिससे यहां पर पोषक तत्वों का विकास नहीं हो पाता है। इसलिए यहां पाए जाने वाले जीव जंतु आकार में अत्यधिक बड़े होते हैं। जैसे -: व्हेल, शार्क।

गर्त -:

महासागर का यह सबसे गहरा भाग होता है। जो लगभग खड़ी दीवार के जैसा होता है। अब तक ज्ञात गर्तों की संख्या लगभग 57 है। प्रशांत महासागर में सबसे ज्यादा गर्त तथा सबसे गहरी गर्त पाई जाती हैं। विश्व की सबसे गहरी गर्त मेरियाना गर्त प्रशांत महासागर में ही है। ये गर्तें भू पर्पटी के वलन अथवा भ्रंशण से उत्पन्न माने जाते हैं। इस प्रकार इनकी उत्पत्ति विवर्तनिक है।

द्वीप -:

सभी महासागरों में बड़ी संख्या में द्वीप पाए जाते हैं। अलग अलग महासागरों में और उनके अलग अलग भागों में द्वीपों की संख्या अलग अलग पाई जाती है। जैसे -: प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग में तुलनात्मक रूप से द्वीप कम हैं। जबकि पश्चिमी भाग में द्वीपों की संख्या अत्यधिक है। उत्पत्ति के आधार पर महासागरों में अलग अलग प्रकार के द्वीप पाए जाते हैं। कुछ द्वीप ज्वालामुखी से बनते हैं। जैसे -: जापान और फिलीपींस के द्वीप। कुछ द्वीप प्रवाल के बने होते हैं। जैसे -: लक्षद्वीप, मालद्वीव, बहामास के द्वीप, कैरीबियन द्वीप आदि। कुछ द्वीप निक्षेप जनित भी होते हैं। जैसे -: न्यू मूरे द्वीप, जो गंगा नदी के निक्षेप से बना है।

Ocean bottom relief meaning in hindi ?

महासागरीय नितल के उच्चावच

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