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30 + Famous Swami Dayanand Saraswati Quotes In Hindi

हिन्दी ऑनलाइन जानकारी के मंच पर आज हम पढ़ेंगे आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल वचन, Swami Dayanand Saraswati Quotes In Hindi, Swami Dayanand Saraswati Thoughts in hindi, महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार।

Swami Dayanand Saraswati Quotes In Hindi, महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार -:

~ आत्मा एक है, लेकिन उसके अस्तित्व अनेक हैं।

~ जीभ से वही निकलना चाहिए जो अपने हृदय में हैं।

~ अज्ञानी होना गलत नहीं है। अज्ञानी बने रहना गलत है।

~ मनुष्य को दिया गया सबसे बड़ा संगीत वाद्य, उसकी आवाज है।

~ मानव जीवन में लोगों के दुखों का मूल कारण ‘तृष्णा’ और ‘लालसा’ होती है।

~ कोई भी मूल्य तब मूल्यवान है जब उस मूल्य का मूल्य किसी के लिए मूल्यवान हो।

~ पूरी तरह से अंधविश्वासी होने के बजाय वर्तमान जीवन में कर्म अधिक महत्वपूर्ण हैं।

~ दुनिया को आप अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए, आपके पास भी सर्वश्रेष्ठ ही लौट कर आएगा।

~ आर्य समाज की स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य संसार के लोगों का उपकार करना है।

~ लोग कहते हैं कि वे समझते हैं कि मैं क्या कहता हूं और मैं सरल हूं। मैं सरल नहीं हूँ, मैं स्पष्ट हूं।

~ सेवा का उच्चतम रूप एक ऐसे व्यक्ति की मदद करना है, जो बदले में धन्यवाद देने में असमर्थ है।

~ गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करता है। और बिना गीत के, मर्म को छूना मुश्किल है।

~ वेद सभी सत्य विधाओं की किताब है, वेदों को पढना-पढाना, सुनना-सुनाना सभी आर्यों का परम धर्म है।

~ अहंकार इंसान की वह स्थिति है, जिसमें वह अपने मूल कर्तव्यों को भूलकर विनाश की ओर चला जाता है।

~ सबसे श्रेष्ठ किस्म की सेवा ऐसे व्यक्ति की मदद करना है जो बदले में आपको धन्यवाद कहने में भी असमर्थ हो।

~ अगर आप पर हमेशा ऊँगली उठाई जाती रहे तो आप भावनात्मक रूप से अधिक समय तक खड़े नहीं हो सकते।

~ लाभ बुराइयों को दूर करता है, सदाचार की प्रथा को पेश करता है, और समाज कल्याण और सभ्यता को जोड़ता है।

~ लोगों को कभी भी चित्रों की पूजा नहीं करनी चाहिए। मानसिक अंधकार का प्रसार मूर्तिपूजा के प्रचलन के कारण है।

~ हमें पता होना चाहिए कि भाग्य भी कमाया जाता है थोपा नहीं जा सकता। और ऐसी कोई कृपा नहीं है जो कमाई ना जा सके।

~ लोगों को कभी भी तस्वीरों की पूजा पाठ नही करनी चाहिए, मानसिक अन्धकार का फैलाव मूर्ति पूजा के प्रचलन की वजह से है।

~ जो व्यक्ति सबसे कम ग्रहण करता है और सबसे अधिक योगदान देता है वह परिपक्व है, क्योंकि देने में ही आत्म-विकास निहित है।

~ उपकार बुराइयों को दूर करता है, सदाचार की आदत को प्रारंभ करता है, और समाज कल्याण और सभ्यता को संपादित करता है।

~ नुकसान से निपटने में सबसे जरूरी चीज है, उससे मिलने वाली सीख को कभी ना भूलना। यही चीज आपको सही मायने में विजेता बनाएगी।

~ ईश्वर का न तो रूप है और न ही रंग। वह दिव्य और अपार है। दुनिया में जो कुछ भी दिखाई दे रहा है वह उसकी महानता का वर्णन करता है।

~ वो अच्छा और बुद्धिमान है जो हमेशा सच बोलता है, पुण्य के कामों पर काम करता है, और दूसरों को अच्छा और खुश करने की कोशिश करता है।

~ इंसान को किसी से भी ईर्ष्या नही करनी चाहिए, क्योंकि ईर्ष्या इंसान को अंदर ही अंदर जलाती रहती है, और पथ से भटकाकर पथ को भ्रष्ट कर देती है।

~ आप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप आजाद हो सकें। लेकिन यह कभी उस तरह से काम नहीं करता है। दूसरों को स्वीकार करें और आप स्वतंत्र हैं।

~ जो ताकतवर होकर कमजोर लोगों की मदद करता है, वही वास्तविक मनुष्य कहलाता है, ताकत के अहंकार में कमजोर का शोषण करने वाला तो पशु की श्रेणी में आता है।

~ किसी भी कार्य को करने से पहले सोचना अक्लमंदी होती है और काम को करते हुए सोचना सावधानी कहलाती है, लेकिन काम को करने के बाद सोचना मूर्खता कहलाती है।

~ छात्र की योग्यता ज्ञान अर्जित करने के प्रति उसके प्रेम, निर्देश पाने की उसकी इच्छा, ज्ञानी और अच्छे व्यक्तियों के प्रति सम्मान, गुरु की सेवा और उनके आदेशों का पालन करने में दिखती है।

~ मुझे सत्य का पालन करना पसंद है। बल्कि, मैंने औरों को उनके अपने भले के लिए सत्य से प्रेम करने और मिथ्या को त्यागने के लिए राजी करने को अपना कर्त्तव्य बना लिया है। अतः अधर्म का अंत मेरे जीवन का उदेश्य है।

Thank you for reading महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल वचन, Swami Dayanand Saraswati Quotes In Hindi, Swami Dayanand Saraswati Thoughts in hindi, महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार।

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